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ओल्ड पेंशन स्कीम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, यूपी के रिटायर्ड कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 25, 2026 01:33 pm IST,  Updated : Sep 25, 2026 01:33 pm IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा के 3 रिटायर्ड संग्रह अमीनों को पुरानी पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पेंशन पात्रता तय करते समय नियमित नियुक्ति से पहले की मौसमी सेवा भी गिनी जा सकती है, जबकि पेंशन राशि नियमित सेवा से तय होगी।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट। Image Source : ANI

Highlights

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन रिटायर्ड संग्रह अमीनों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया।
  • कोर्ट ने कहा, नियमितीकरण से पहले की मौसमी सेवा भी पेंशन पात्रता में गिनी जाएगी।
  • उत्तर प्रदेश सरकार को आठ सप्ताह में सभी रिटायरमेंट बकाये का भुगतान करना होगा।

Old Pension Scheme Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा जिले के 3 रिटायर्ड संग्रह अमीनों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि तीनों कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पेंशन स्कीम) का लाभ दिया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि कर्मचारी की नियमित नियुक्ति से पहले की गई सेवा को भी पेंशन के लिए जरूरी सेवा अवधि तय करते समय गिना जा सकता है। हालांकि, पेंशन की राशि की गणना केवल नियमित सेवा के आधार पर की जाएगी। यह आदेश जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता ने राम सनेही और 2 अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

मौसमी संग्रह अमीन के तौर पर हुई थी नियुक्ति

याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति बांदा जिले की अलग-अलग तहसीलों में मौसमी संग्रह अमीन (सीजनल कलेक्शन अमीन) के पद पर हुई थी। इनमें एक की नियुक्ति तहसील सदर में 1 सितंबर 1989 को, जबकि दो अन्य की नियुक्ति 17 दिसंबर 1990 को बाबेरू और अतर्रा तहसील में हुई थी। तीनों ने कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उनकी सेवाओं को नियमित किया गया। पहले याचिकाकर्ता की सेवा 2005 में और दूसरे व तीसरे याचिकाकर्ता की सेवाएं 2009 में नियमित हुईं। तीनों अलग-अलग समय पर रिटायर हुए। पहले याचिकाकर्ता 2019, दूसरे 2021 और तीसरे 2022 में रिटायर हुए।

पुरानी पेंशन के दावे को विभाग ने किया था खारिज

रिटायरमेंट के बाद तीनों कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग की। हालांकि, विभाग ने 12 अप्रैल 2023 के आदेश के जरिए उनकी मांग खारिज कर दी थी। विभाग का कहना था कि कर्मचारियों ने पेंशन के लिए जरूरी न्यूनतम पात्र सेवा अवधि पूरी नहीं की है। इसके बाद तीनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं के वकील सैयद वाजिद अली ने कोर्ट के सामने कई पुराने फैसलों का हवाला दिया। इनमें प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2019) और उदय प्रताप ठाकुर बनाम बिहार राज्य के फैसले भी शामिल थे। वकील ने दलील दी कि कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति से पहले की गई सेवा को भी पेंशन के लिए जरूरी सेवा अवधि में गिना जाना चाहिए।

कोर्ट ने पूरे मामले को लेकर क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने पहले के अलख प्रकाश मिश्रा मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि अस्थायी, एडहॉक, वर्क-चार्ज, मौसमी या दूसरी अस्थायी सेवाओं को भी पेंशन के लिए जरूरी पात्र सेवा अवधि तय करने में गिना जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने एक अहम बात भी स्पष्ट की। उसने कहा कि पेंशन की वास्तविक राशि की गणना केवल कर्मचारी की नियमित सेवा अवधि के आधार पर ही की जाएगी।

दो कर्मचारियों की नियमित सेवा 10 साल से ज्यादा

कोर्ट ने पाया कि दूसरे और तीसरे याचिकाकर्ता ने नियमितीकरण के बाद 10 साल से ज्यादा की नियमित सेवा पूरी की थी। इसलिए वे पेंशन के लिए जरूरी सेवा अवधि की शर्त पूरी करते थे। वहीं, पहले याचिकाकर्ता की नियमित सेवा जरूरी अवधि से कुछ महीने कम थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब उसकी नियमित नियुक्ति से पहले की गई मौसमी संग्रह अमीन की सेवा को भी गणना में शामिल किया गया, तो वह भी पेंशन का हकदार हो गया। इस तरह कोर्ट ने तीनों कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का रास्ता साफ कर दिया।

8 हफ्ते में करना होगा रिटायरमेंट बकाया का भुगतान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि तीनों याचिकाकर्ताओं के रिटायरमेंट से जुड़े सभी बकाये की गणना कर भुगतान किया जाए। सरकार को यह प्रक्रिया कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति जमा किए जाने की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। हालांकि, कोर्ट ने फिर स्पष्ट किया कि पेंशन की राशि उनकी पूरी सेवा अवधि पर नहीं, बल्कि संबंधित कर्मचारी की नियमित सेवा की अवधि के आधार पर तय की जाएगी। (ANI से इनपुट्स के साथ)

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